मुनिया
मुनिया माथा पर पानी ढोते ढोते थक के बैठ गेलय।भीतरी से माय हंकावे लगलखीं। गे मुनिया आउ पनिया ला देंहीं। भाउजी नहइथुं।
![]() |
लता प्रासर |
बाकि मुनिया के बोखार से नीन नय आ रहले हल। मुनिया लोर झोर होबय आउ सोचय हमरो मैया पढ़े लगी भेजते हल त हमहूं भउजी नियन रोज जैतिये हल कमाय लगी।आउ केकरो बात कहे के हिम्मत नय होते हल।
भैया नौकरी कर हय भउजी नौकरी कर हय आउ हमरा दाय नियन खटबाब हम। मैया भी भउजिए के मान हय।
इहे सोचते-सोचते कखने ओकर आंख लग गेलय नय मालूम।
मुनिया पढ़-लिख कर .............,,?
मुनिया के आंख लगते सपना ऐलय।
आज मुनिया कलक्टर बन गेलय ह। ओकर आगु पीछु कते गो सिपाही है आउ मुनिया गामे गाम जा के छौड़ी सबके जमा कर रहले ह। सपनपुर गाम के पीछु जे बगैचा हय ओकरा में दु तीन हजार छौड़ी सब जमा हो गेलय।अब मुनिया के संतोष हो रहलय ह कि ओकर बात के सुने लगी सब माय बाप अप्पन अप्पन बेटियन आबे देलखीं।
तब मुनकी बोललय तोहनी सब इ लगी बोलैलियो ह कि अब तोहनी के अप्पन मन मोताबिक पढ़े के व्यवस्था हम करबो। बाकि तोहनियों के वादा करे पड़तो कि मन लगा के पढ़भो।
कुल छौड़ी सब ठड़ी होके हल्ला करे लगलय हमनीं सब पढ़बो। हमनियों सब चाह ही कि तोरे नियन बन जाऊं।
मुनकी मन गदगद हो गेलय। ओकर बांह पसारते ही सभे टूट पड़लय मुनकी से गला मिलाबे लगी। एतने में मुनकी के आंख खुल गेलय। सामने ओकर भउजी ठड़ी होके मुसक रहले हल।
मुनकी अकचका के पूछे लगलय कि होलो भउजी। भउजी मुनिया के हाथ पकड़ के चुप हो गेलय। मुनिया के आंख लोरझोर देख के कहलकय तोरा पढ़े के मन हकों हम तोरा पढ़इबो।
मुनिया मने में देवी देवता के याद करके बोल्या हे भगवान सब के ऐसने भौजी दिहो।
......
लिखताहर - लता प्रासर
लिखाताहर के ईमेल आईडी - kumarilataprasar@gmail.com
प्रतिक्रिया हेतु ईमेल आईडी - editorbejodindia@yahoo.com
No comments:
Post a Comment